कुरान - 27:67 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبٗا وَءَابَآؤُنَآ أَئِنَّا لَمُخۡرَجُونَ

Transliteration: (Wa qaalal lazeena kafarooo 'a-izaa kunnaa turaabanw wa aabaaa'unaaa a'innaa lamukhrajoon)

और काफ़िरों ने कहा, 'क्या जब हम और हमारे बाप-दादा मिट्टी हो जाएंगे, तो क्या हम सचमुच (दोबारा ज़िंदा करके) निकाले जाएंगे [132]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 67

"और काफ़िरों ने कहा, 'क्या जब हम और हमारे बाप-दादा मिट्टी हो जाएंगे, तो क्या हम सचमुच (दोबारा ज़िंदा करके) निकाले जाएंगे [132]?'"

[132] बाअ़्स और हश्र का इनकार

यानी मुशरिकीन क़ब्रों से ज़िंदा होकर निकलने और अपने आमाल का हिसाब देने को नामुम्किन समझते थे। उनका ख़्याल था कि जब जिस्म सड़-गल कर ख़ाक में मिल जाएगा तो दोबारा कैसे जमा होगा? वे अल्लाह की क़ुदरत-ए-कामिला को भूल बैठे जिसने उन्हें पहले भी ख़ाक ही से पैदा फ़रमाया था।

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