कुरान - 27:65 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
قُل لَّا يَعۡلَمُ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ ٱلۡغَيۡبَ إِلَّا ٱللَّهُۚ وَمَا يَشۡعُرُونَ أَيَّانَ يُبۡعَثُونَ

Transliteration: (Qul laa ya'lamu man fis sammaawaati wal ardil ghaiba illal laah; wa maa yash'uroona aiyaana yub'asoon)

(ऐ नबी!) आप फ़रमा दीजिए कि आसमानों और ज़मीन में जो कोई भी हैं [128] अल्लाह के सिवा ख़ुद से ग़ैब नहीं जानते; और उन्हें तो यह भी शऊर नहीं कि वे कब उठाए जाएंगे [129]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 65

"(ऐ नबी!) आप फ़रमा दीजिए कि आसमानों और ज़मीन में जो कोई भी हैं [128] अल्लाह के सिवा ख़ुद से ग़ैब नहीं जानते; और उन्हें तो यह भी शऊर नहीं कि वे कब उठाए जाएंगे [129]!"

[128] ज़ाती इल्म-ए-ग़ैब सिर्फ़ अल्लाह के लिए

यानी आसमान व ज़मीन की कोई मख़लूक़ बिल-ज़ात (अपनी ज़ात से बिना अता के) ग़ैब का इल्म नहीं रखती, ज़ाती इल्म-ए-ग़ैब सिर्फ़ अल्लाह तआला की सिफ़त-ए-ख़ास्सा है। रहा अंबिया-ए-किराम अलैहिमुस्सलाम का इल्म-ए-ग़ैब, तो वह अल्लाह की अता व वही से (अताई) है। अल्लाह तआला ने अपने महबूब हुज़ूर अकरम ﷺ को तमाम कायनात के उलूम और ग़ैब की ख़बरों से नवाज़ा है जैसा कि सूरह अल-जिन्न में फ़रमाया: "वह ग़ैब का जानने वाला है, पस अपने ग़ैब पर किसी को ग़ालिब नहीं करता सिवाय अपने पसंदीदा रसूल के।"

[129] क़ियामत के वक़्त का इख़फ़ा

यह आयत मुशरिकीन के इस सवाल के जवाब में नाज़िल हुई कि क़ियामत कब आएगी। मुशरिकीन को तो यह भी ख़बर नहीं कि वे मरने के बाद कब उठाए जाएंगे, फिर वे क़ियामत का मज़ाक़ उड़ाने के लिए वक़्त क्यों पूछते हैं!

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