Transliteration: (Qul laa ya'lamu man fis sammaawaati wal ardil ghaiba illal laah; wa maa yash'uroona aiyaana yub'asoon)
"(ऐ नबी!) आप फ़रमा दीजिए कि आसमानों और ज़मीन में जो कोई भी हैं [128] अल्लाह के सिवा ख़ुद से ग़ैब नहीं जानते; और उन्हें तो यह भी शऊर नहीं कि वे कब उठाए जाएंगे [129]!"
यानी आसमान व ज़मीन की कोई मख़लूक़ बिल-ज़ात (अपनी ज़ात से बिना अता के) ग़ैब का इल्म नहीं रखती, ज़ाती इल्म-ए-ग़ैब सिर्फ़ अल्लाह तआला की सिफ़त-ए-ख़ास्सा है। रहा अंबिया-ए-किराम अलैहिमुस्सलाम का इल्म-ए-ग़ैब, तो वह अल्लाह की अता व वही से (अताई) है। अल्लाह तआला ने अपने महबूब हुज़ूर अकरम ﷺ को तमाम कायनात के उलूम और ग़ैब की ख़बरों से नवाज़ा है जैसा कि सूरह अल-जिन्न में फ़रमाया: "वह ग़ैब का जानने वाला है, पस अपने ग़ैब पर किसी को ग़ालिब नहीं करता सिवाय अपने पसंदीदा रसूल के।"
यह आयत मुशरिकीन के इस सवाल के जवाब में नाज़िल हुई कि क़ियामत कब आएगी। मुशरिकीन को तो यह भी ख़बर नहीं कि वे मरने के बाद कब उठाए जाएंगे, फिर वे क़ियामत का मज़ाक़ उड़ाने के लिए वक़्त क्यों पूछते हैं!
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