कुरान - 27:73 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Wa inna Rabbaka lazoo fadlin 'alan naasi wa laakinna aksarahum laa yashkuroon)

और बेशक आपका रब लोगों पर बड़ा फ़ज़्ल फ़रमाने वाला है [139], लेकिन उनमें से अक्सर शुक्र अदा नहीं करते [140]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 73

"और बेशक आपका रब लोगों पर बड़ा फ़ज़्ल फ़रमाने वाला है [139], लेकिन उनमें से अक्सर शुक्र अदा नहीं करते [140]।"

[139] दुनिया में आम फ़ज़्ल व एहसान

यहाँ 'लोग' से मुराद मोमिन व काफ़िर तमाम इंसान हैं। अल्लाह तआला का फ़ज़्ल यह है कि वह नाफ़रमानों को फ़ौरन अज़ाब में नहीं पकड़ता बल्कि उन्हें मोहलत और रिज़्क़ अता फ़रमाता है।

[140] नेमतों की ना-शुक्री

काफ़िर शुक्र बजा लाने के बजाय अपनी सरकशी में बढ़ते जाते हैं और तकब्बुर के साथ अज़ाब की जल्दी मचाते हैं, जो उनकी इंतिहाई बेवक़ूफ़ी और ना-शुक्री का सुबूत है।

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