कुरान - 27:75 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
وَمَا مِنۡ غَآئِبَةٖ فِي ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٍ

Transliteration: (Wa maa min ghaaa'ibatin fis samaaa'i wal ardi illaa fee kitaabin mubeen)

और आसमान और ज़मीन की कोई छुपी हुई चीज़ ऐसी नहीं मगर वह एक रौशन किताब (लौहे महफ़ूज़) में दर्ज है [142]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 75

"और आसमान और ज़मीन की कोई छुपी हुई चीज़ ऐसी नहीं मगर वह एक रौशन किताब (लौहे महफ़ूज़) में दर्ज है [142]।"

[142] लौहे महफ़ूज़ में तमाम ग़ैब का दर्ज होना

इस आयत से साबित हुआ कि कायनात का हर छुपा और ज़ाहिर राज़, कायनात के बनने से लेकर क़ियामत तक के तमाम वाक़िआत, एक रौशन किताब 'लौहे महफ़ूज़' में लिखे हुए हैं। जब मख़लूक़ (लौह व क़लम) में सब कुछ लिख दिया गया तो ख़ालिक़ के इल्म की वुसअत का क्या ठिकाना!

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