कुरान - 27:77 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
وَإِنَّهُۥ لَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa innahoo lahudanw wa rahmatul lilmu'mineen)

और बेशक यह ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत है [144]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 77

"और बेशक यह ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत है [144]।"

[144] ईमान वालों के लिए ख़ास रहमत

अगरचे क़ुरआन की दावत व हिदायत तमाम इंसानियत के लिए आम है, मगर इससे हक़ीक़ी फ़ायदा सिर्फ़ मोमिनीन ही उठाते हैं जो इस पर दिल से ईमान लाते हैं और इसके अहकाम पर अमल करते हैं। इसलिए यह उनके लिए ख़ास हिदायत और सबब-ए-रहमत है।

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