Transliteration: (Wa innahoo lahudanw wa rahmatul lilmu'mineen)
"और बेशक यह ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत है [144]।"
अगरचे क़ुरआन की दावत व हिदायत तमाम इंसानियत के लिए आम है, मगर इससे हक़ीक़ी फ़ायदा सिर्फ़ मोमिनीन ही उठाते हैं जो इस पर दिल से ईमान लाते हैं और इसके अहकाम पर अमल करते हैं। इसलिए यह उनके लिए ख़ास हिदायत और सबब-ए-रहमत है।
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