कुरान - 27:76 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
إِنَّ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ أَكۡثَرَ ٱلَّذِي هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Inna haazal Qur-aana yaqussu 'alaa Baneee israaa'eela aksaral lazee hum feehi yakhtalifoon)

बेशक यह क़ुरआन बनी इसराईल पर उन अक्सर बातों की हक़ीक़त बयान करता है जिनमें वे इख़्तिलाफ़ करते हैं [143]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 76

"बेशक यह क़ुरआन बनी इसराईल पर उन अक्सर बातों की हक़ीक़त बयान करता है जिनमें वे इख़्तिलाफ़ करते हैं [143];"

[143] मुतनाज़ा उमूर का फ़ैसला

बनी इसराईल अपनी किताबों (तौरात व इंजील) में तहरीफ़ करके बहुत से दीनी मसाइल (जैसे हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की हक़ीक़त, हलाल व हराम के अहकाम) में आपस में गहरे मतभेदों का शिकार हो गए थे। क़ुरआन मजीद ने नाज़िल होकर उनके तमाम इख़्तिलाफ़ात का हक़ और वाज़ेह फ़ैसला फ़रमा दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now