Transliteration: (Fatawakkal 'alal laahi innaka 'alal haqqil mubeen)
"पस आप अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) रखिए; बेशक आप बिल्कुल खुले (वाज़ेह) हक़ पर हैं [145]।"
यानी हुज़ूर अकरम ﷺ की हक़्क़ानियत और नबुव्वत दोपहर के सूरज की तरह रौशन व वाज़ेह है। केवल वही लोग इसका इनकार करते हैं जो रूहानी तौर पर अंधे हैं। अल्लाह पर कामिल भरोसा रखने वाले को कभी किसी मुख़ालिफ़त का अंदेशा नहीं होता।
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