कुरान - 27:79 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
فَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنَّكَ عَلَى ٱلۡحَقِّ ٱلۡمُبِينِ

Transliteration: (Fatawakkal 'alal laahi innaka 'alal haqqil mubeen)

पस आप अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) रखिए; बेशक आप बिल्कुल खुले (वाज़ेह) हक़ पर हैं [145]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 79

"पस आप अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) रखिए; बेशक आप बिल्कुल खुले (वाज़ेह) हक़ पर हैं [145]।"

[145] नबुव्वत का वाज़ेह और रौशन हक़ होना

यानी हुज़ूर अकरम ﷺ की हक़्क़ानियत और नबुव्वत दोपहर के सूरज की तरह रौशन व वाज़ेह है। केवल वही लोग इसका इनकार करते हैं जो रूहानी तौर पर अंधे हैं। अल्लाह पर कामिल भरोसा रखने वाले को कभी किसी मुख़ालिफ़त का अंदेशा नहीं होता।

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