Transliteration: (Innaka laa tusmi'ul mawtaa wa laa tusmi'us summad du'aaa izaa wallaw mudbireen)
"बेशक आप न मुर्दों को सुना सकते हैं [146] और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हैं जब वे पीठ फेर कर भाग रहे हों;"
यहाँ 'मुर्दे' और 'बहरे' मुशरिकीन व कुफ़्फ़ार के लिए इस्तिआरा (तशबीह) के तौर पर इस्तेमाल हुआ है। यानी जिस तरह मुर्दा और बहरा नफ़ा उठाने वाली बात नहीं सुन सकता, उसी तरह वे मुनकिरीन जिनके दिल हक़ से मर चुके हैं, वे नसीहत क़बूल नहीं करते। इसका यह मतलब हरगिज़ नहीं कि क़ब्र के मुर्दे नहीं सुनते, क्योंकि सहीह अहादीस (जैसे बद्र के कुफ़्फ़ार से ख़िताब और सलाम अलल-क़ुबूर) से साबित है कि मुर्दे सुनते हैं।
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