कुरान - 27:80 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

80
إِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَلَا تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ

Transliteration: (Innaka laa tusmi'ul mawtaa wa laa tusmi'us summad du'aaa izaa wallaw mudbireen)

बेशक आप न मुर्दों को सुना सकते हैं [146] और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हैं जब वे पीठ फेर कर भाग रहे हों; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 80 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 80

"बेशक आप न मुर्दों को सुना सकते हैं [146] और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हैं जब वे पीठ फेर कर भाग रहे हों;"

[146] रूहानी मुर्दों और बहरों का इस्तिआरा

यहाँ 'मुर्दे' और 'बहरे' मुशरिकीन व कुफ़्फ़ार के लिए इस्तिआरा (तशबीह) के तौर पर इस्तेमाल हुआ है। यानी जिस तरह मुर्दा और बहरा नफ़ा उठाने वाली बात नहीं सुन सकता, उसी तरह वे मुनकिरीन जिनके दिल हक़ से मर चुके हैं, वे नसीहत क़बूल नहीं करते। इसका यह मतलब हरगिज़ नहीं कि क़ब्र के मुर्दे नहीं सुनते, क्योंकि सहीह अहादीस (जैसे बद्र के कुफ़्फ़ार से ख़िताब और सलाम अलल-क़ुबूर) से साबित है कि मुर्दे सुनते हैं।

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