Transliteration: (Wa qad nazzala 'alaikum fil Kitaabi an izaa sami'tum Aayaatil laahi yukfaru bihaa wa yustahza u bihaa falaa taq'udoo ma'ahum hattaa yakhoodoo fee hadeesin ghairih; innakum izam misluhum; innal laaha jaami'ul munaafiqeena wal kaafireena fee jahannama jamee'aa)
यह आयत हर उस महफ़िल या माहौल पर लागू होती है जहाँ अल्लाह की आयतों का मज़ाक बनाया जाए या उनका इनकार किया जाए।
ईमानदार मुसलमान के लिए यह फ़र्ज़ है कि:
इस आयत से यह सबक़ मिलता है कि:
इस आयत के अंत में सख़्त चेतावनी है:
अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को एक ही जगह — जहन्नम में — इकट्ठा करेगा।
हालाँकि दूसरे स्थान पर फ़रमाया गया:
"निःसंदेह मुनाफ़िक़ लोग जहन्नम के सबसे निचले दर्जे में होंगे" —
लेकिन फिर भी उन्हें काफ़िरों के साथ ही अंजाम तक पहुँचाया जाएगा, क्योंकि
अल्लाह की आयतों का मज़ाक और इनकार, दोनों का अंजाम आग ही है।
यह आयत ईमान वालों के लिए गंभीर चेतावनी है कि वे
हर उस चीज़ से दूरी बनाए रखें जो अल्लाह की तौहीन या उसके दीन की बेइज़्ज़ती करे,
और क़ुरआन और दीन की इज्ज़त की हर हाल में हिफ़ाज़त करें।
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