कुरान - 4:140 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

140
وَقَدۡ نَزَّلَ عَلَيۡكُمۡ فِي ٱلۡكِتَٰبِ أَنۡ إِذَا سَمِعۡتُمۡ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ يُكۡفَرُ بِهَا وَيُسۡتَهۡزَأُ بِهَا فَلَا تَقۡعُدُواْ مَعَهُمۡ حَتَّىٰ يَخُوضُواْ فِي حَدِيثٍ غَيۡرِهِۦٓ إِنَّكُمۡ إِذٗا مِّثۡلُهُمۡۗ إِنَّ ٱللَّهَ جَامِعُ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱلۡكَٰفِرِينَ فِي جَهَنَّمَ جَمِيعًا

Transliteration: (Wa qad nazzala 'alaikum fil Kitaabi an izaa sami'tum Aayaatil laahi yukfaru bihaa wa yustahza u bihaa falaa taq'udoo ma'ahum hattaa yakhoodoo fee hadeesin ghairih; innakum izam misluhum; innal laaha jaami'ul munaafiqeena wal kaafireena fee jahannama jamee'aa)

और यक़ीनन अल्लाह ने किताब (क़ुरआन) में तुम्हारी तरफ़ यह हुक्म नाज़िल किया है कि जब तुम सुनो कि अल्लाह की आयतों का इनकार किया जा रहा है और उनका मज़ाक उड़ाया जा रहा है [413], तो तुम उनके साथ न बैठो जब तक कि वे कोई और बात न करने लगें [414]। वरना तुम भी उन्हीं जैसे हो जाओगे। बेशक अल्लाह मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों — सबको जहन्नम में इकट्ठा करेगा [415]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 140 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 140 की तफ़्सीर

 

✅ [413] उस महफ़िल में बैठना हराम है जहाँ दीन का मज़ाक उड़ाया जाए

यह आयत हर उस महफ़िल या माहौल पर लागू होती है जहाँ अल्लाह की आयतों का मज़ाक बनाया जाए या उनका इनकार किया जाए।
ईमानदार मुसलमान के लिए यह फ़र्ज़ है कि:

  • ऐसी जगहों पर कभी न जाए, जहाँ दीन का अपमान हो रहा हो।
  • अगर पहले से मौजूद हो और ऐसी हरकत शुरू हो जाए, तो फौरन उठकर वहां से चला जाए।
  • अगर ताक़त है, तो उस मज़ाक को रोक दे,
  • या कम से कम ज़बान से एतराज़ दर्ज कराए, ताकि उस गुनाह में शरीक न समझा जाए।

✅ [414] चुपचाप बैठकर देखना भी शरीअत में गुनाह है

इस आयत से यह सबक़ मिलता है कि:

  • दीन का मज़ाक उड़ाना,
  • लोगों को कुफ़्र की तरफ़ उभारना,
  • या ऐसे माहौल में बैठना, भले ही खामोशी से,
    — सभी चीज़ें गुनाह हैं और कुफ़्र की हद तक ले जाती हैं।
    इसलिए शरीअत ने मना किया है कि मुसलमान:
  • ऐसे मजलिसों में शरीक न हो जहाँ
    • मातम और लानत-मलामत हो,
    • अल्लाह की आयतों का मज़ाक उड़ाया जाए,
    • इस्लामी शिक्षाओं की हँसी उड़ाई जाए।
      चाहे वह खामोशी से ही बैठा हो, अगर वह बुराई को बदलने या रोकने के इरादे से नहीं आया, तो वह भी उसी गुनाह का हिस्सा माना जाएगा।

✅ [415] मुनाफ़िक़ और काफ़िर — दोनों एक साथ जहन्नम में होंगे

इस आयत के अंत में सख़्त चेतावनी है:
अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को एक ही जगह — जहन्नम में — इकट्ठा करेगा।
हालाँकि दूसरे स्थान पर फ़रमाया गया:
"निःसंदेह मुनाफ़िक़ लोग जहन्नम के सबसे निचले दर्जे में होंगे" —
लेकिन फिर भी उन्हें काफ़िरों के साथ ही अंजाम तक पहुँचाया जाएगा, क्योंकि
अल्लाह की आयतों का मज़ाक और इनकार, दोनों का अंजाम आग ही है।
यह आयत ईमान वालों के लिए गंभीर चेतावनी है कि वे
हर उस चीज़ से दूरी बनाए रखें जो अल्लाह की तौहीन या उसके दीन की बेइज़्ज़ती करे,
और क़ुरआन और दीन की इज्ज़त की हर हाल में हिफ़ाज़त करें।

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