Transliteration: (Wallaahu yureedu ai yatooba 'alaikum wa yureedul lazeena yattabi 'oonash shahawaati an tameeloo mailan 'azeemaa)
दुनियावी कार्यों में लगे रहते हुए भी, इंसान को हमेशा अल्लाह की ओर रुजू करते रहना चाहिए।
अल्लाह ने अपनी रहमत के तहत हमारी ज़िन्दगी में कुछ सीमाएं और बंदिशें रखी हैं,
ताकि हम गुनाह की हदों को पार न करें और हर हाल में अल्लाह को याद रखें।
ये सीमाएं कोई बोझ नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत की निशानी हैं।
इससे यह सीख मिलती है कि:
इस्लाम से बाहर की राहों पर चलने वाले,
ख़ासकर वे लोग जो ख्वाहिशपरस्ती और वासना को बढ़ावा देते हैं,
वे दूसरों को भी सच्चाई से भटका देना चाहते हैं।
इस्लाम नैतिक अनुशासन का पक्षधर है,
जबकि दूसरे रास्ते अक्सर बेदारी और हदों से बाहर की आज़ादी को बढ़ावा देते हैं।
इसलिए इस्लाम का रास्ता है पाकीज़गी, संयम और ईश्वरीय मार्गदर्शन का,
जबकि ख्वाहिशों की राह है गुमराही और हद से ज़्यादा भोग की।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat