Transliteration: (Yureedul laahu ai yukhaffifa 'ankum; wa khuliqal insaanu da'eefaa)
इस आयत में यह भरोसा दिलाया गया है कि इस्लामी क़ानून,
ख़ासकर विवाह और शराफ़त से संबंधित नियम,
इंसानी कमज़ोरियों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
अल्लाह अपने बंदों पर उनकी सामर्थ्य से ज़्यादा बोझ नहीं डालता,
बल्कि उन्हें पाकीज़ा और संभालने योग्य रास्ता दिखाता है।
"इंसान को कमज़ोर पैदा किया गया है" — इस वाक्य का मतलब है कि:
मर्द और औरत एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
उनकी जज़्बाती, जिस्मानी और समाजिक ज़रूरतें आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
इसी वजह से:
विवाह से संबंधित नियमों को विस्तार और स्पष्टता के साथ बताया गया है,
ताकि इंसान बेबाकी या गुमराही में न पड़े,
बल्कि एक संतुलित और वैध रास्ते से अपनी ज़रूरतों को पूरा करे।
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