कुरान - 4:29 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَأۡكُلُوٓاْ أَمۡوَٰلَكُم بَيۡنَكُم بِٱلۡبَٰطِلِ إِلَّآ أَن تَكُونَ تِجَٰرَةً عَن تَرَاضٖ مِّنكُمۡۚ وَلَا تَقۡتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُمۡ رَحِيمٗا

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa ta'kulooo amwaalakum bainakum bilbaatili 'illaaa an takoona tijaaratan 'an taraadim minkum; wa laa taqtulooo anfusakum; innal laaha kaana bikum Raheemaa)

ऐ ईमान वालों! आपस में एक-दूसरे का माल नाजायज़ तरीक़े से न खाओ [117], सिवाय इस के कि आपसी रज़ामंदी से व्यापार के ज़रिए हो [118]। और अपनी जानों को मत मारो [119]। यक़ीनन, अल्लाह तुम्हारे लिए बेहद रहमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा – आयत 29 की तफ़्सीर

 

✅ [117] नाजायज़ कमाई पूरी तरह हराम है

इससे यह शिक्षा मिलती है कि:
हर वह माल जो हराम तरीक़े से हासिल किया गया हो, उसका खाना भी हराम है।
इसलिए इस तरह की कमाई हराम है:
मनोरंजन के लिए गाना गाना, झूठी गवाही देना, दाढ़ी मुँडवाना, या हराम किस्म की फ़ोटोग्राफ़ी।
यह नियम हजारों लेन-देन पर लागू होता है, जैसे:
जुआ, शराब का व्यापार, रिश्वत और गबन, सूद (ब्याज़) की कमाई और अमानत में खयानत —
ये सब इस्लाम में सख़्ती से मना हैं।

✅ [118] व्यापार में आपसी रज़ामंदी ज़रूरी है

इस आयत से साबित होता है कि:
कारोबार में ज़बरदस्ती या धोखा देना जायज़ नहीं।
जैसे:
अगर कोई माल जब्ती में नीलाम किया जाए, और असली मालिक राज़ी न हो,
तो वह सौदा नाजायज़ है — क्योंकि रज़ामंदी मौजूद नहीं।
रियासत (सरकार) भी ऐसी सूरत में माल की मालिक नहीं बन सकती।
हालांकि:
दिवालिया संबंधित नीलामी अगर शरई तरीक़े से हो, तो वह जायज़ हो सकती है।
इसी तरह:
किसी दुकान या मकान को मालिक की नापसंदी के बावजूद बहुत कम किराए पर लेना भी हराम है,
क्योंकि हर सौदे में आपसी रज़ामंदी शर्त है।

✅ [119] आत्महत्या गुनाहे-कबीरा और रूहानी तबाही है

अगर कोई व्यक्ति समझकर आत्महत्या को जायज़ माने,
तो यह कुफ्र है — और वह हमेशा के लिए अजाब में रहेगा।
लेकिन अगर कोई यह जानते हुए कि यह हराम है, फिर भी जज़्बाती तकलीफ़ में आत्महत्या कर ले,
तो वह मुसलमान ही रहेगा, लेकिन गुनाह की वजह से सीमित सज़ा पाएगा।
इसमें शामिल हैं:
आत्महत्या, भूख हड़ताल के कारण मौत, या कोई भी खुद को मार डालने वाला काम —
ये सब इस्लाम में सख़्ती से मना हैं,
क्योंकि ज़िन्दगी अल्लाह की अमानत है।

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