Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa ta'kulooo amwaalakum bainakum bilbaatili 'illaaa an takoona tijaaratan 'an taraadim minkum; wa laa taqtulooo anfusakum; innal laaha kaana bikum Raheemaa)
इससे यह शिक्षा मिलती है कि:
हर वह माल जो हराम तरीक़े से हासिल किया गया हो, उसका खाना भी हराम है।
इसलिए इस तरह की कमाई हराम है:
मनोरंजन के लिए गाना गाना, झूठी गवाही देना, दाढ़ी मुँडवाना, या हराम किस्म की फ़ोटोग्राफ़ी।
यह नियम हजारों लेन-देन पर लागू होता है, जैसे:
जुआ, शराब का व्यापार, रिश्वत और गबन, सूद (ब्याज़) की कमाई और अमानत में खयानत —
ये सब इस्लाम में सख़्ती से मना हैं।
इस आयत से साबित होता है कि:
कारोबार में ज़बरदस्ती या धोखा देना जायज़ नहीं।
जैसे:
अगर कोई माल जब्ती में नीलाम किया जाए, और असली मालिक राज़ी न हो,
तो वह सौदा नाजायज़ है — क्योंकि रज़ामंदी मौजूद नहीं।
रियासत (सरकार) भी ऐसी सूरत में माल की मालिक नहीं बन सकती।
हालांकि:
दिवालिया संबंधित नीलामी अगर शरई तरीक़े से हो, तो वह जायज़ हो सकती है।
इसी तरह:
किसी दुकान या मकान को मालिक की नापसंदी के बावजूद बहुत कम किराए पर लेना भी हराम है,
क्योंकि हर सौदे में आपसी रज़ामंदी शर्त है।
अगर कोई व्यक्ति समझकर आत्महत्या को जायज़ माने,
तो यह कुफ्र है — और वह हमेशा के लिए अजाब में रहेगा।
लेकिन अगर कोई यह जानते हुए कि यह हराम है, फिर भी जज़्बाती तकलीफ़ में आत्महत्या कर ले,
तो वह मुसलमान ही रहेगा, लेकिन गुनाह की वजह से सीमित सज़ा पाएगा।
इसमें शामिल हैं:
आत्महत्या, भूख हड़ताल के कारण मौत, या कोई भी खुद को मार डालने वाला काम —
ये सब इस्लाम में सख़्ती से मना हैं,
क्योंकि ज़िन्दगी अल्लाह की अमानत है।
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