कुरान - 4:61 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ تَعَالَوۡاْ إِلَىٰ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ وَإِلَى ٱلرَّسُولِ رَأَيۡتَ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ يَصُدُّونَ عَنكَ صُدُودٗا

Transliteration: (Wa izaa qeela lahum ta'aalaw ilaa maaa anzalallaahu wa ilar Rasooli ra aital munaafiqeena yasuddoona 'anka sudoodaa)

और जब उनसे कहा जाता है: "आओ उस (क़ानून) की ओर जो अल्लाह ने नाज़िल फ़रमाया है और (आओ) रसूल की ओर," तो आप देखेंगे कि मुनाफ़िक़ आपसे बे-रुख़ी के साथ मुँह मोड़ लेते हैं। [211] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 61 की तफ़्सीर

 

✅ [211] इस्लामी क़ानून के मुक़ाबले ग़ैर-इस्लामी क़ानून को तरजीह देना – मुनाफ़िक़त की निशानी

यह आयत मुनाफ़िक़ों की असली पहचान को उजागर करती है—वे लोग जो ज़ाहिर में ईमान का दावा करते हैं, लेकिन जब उन्हें अल्लाह के नाज़िल फ़रमाए हुए हुक्म और रसूल ﷺ के फ़ैसले की तरफ बुलाया जाता है, तो वे नापसंदी और बे-रुख़ी के साथ मुँह फेर लेते हैं। इससे यह मालूम हुआ कि इस्लामी शरीअत और हुकूमत की मौजूदगी में अमरीकी, बर्तानवी या किसी और ग़ैर-इस्लामी क़ानून को अपनाना मुनाफ़िक़त की इन्तिहा है। क़ुरआन और सुन्नत के फ़ैसलों को छोड़ कर इंसानी बनावट वाले निज़ाम को तर्जीह देना, अल्लाह की हिदायत से इंकार के बराबर है और मुनाफ़िक़त की खुली अलामत है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now