Transliteration: (Wa izaa qeela lahum ta'aalaw ilaa maaa anzalallaahu wa ilar Rasooli ra aital munaafiqeena yasuddoona 'anka sudoodaa)
यह आयत मुनाफ़िक़ों की असली पहचान को उजागर करती है—वे लोग जो ज़ाहिर में ईमान का दावा करते हैं, लेकिन जब उन्हें अल्लाह के नाज़िल फ़रमाए हुए हुक्म और रसूल ﷺ के फ़ैसले की तरफ बुलाया जाता है, तो वे नापसंदी और बे-रुख़ी के साथ मुँह फेर लेते हैं। इससे यह मालूम हुआ कि इस्लामी शरीअत और हुकूमत की मौजूदगी में अमरीकी, बर्तानवी या किसी और ग़ैर-इस्लामी क़ानून को अपनाना मुनाफ़िक़त की इन्तिहा है। क़ुरआन और सुन्नत के फ़ैसलों को छोड़ कर इंसानी बनावट वाले निज़ाम को तर्जीह देना, अल्लाह की हिदायत से इंकार के बराबर है और मुनाफ़िक़त की खुली अलामत है।
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