कुरान - 4:62 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
فَكَيۡفَ إِذَآ أَصَٰبَتۡهُم مُّصِيبَةُۢ بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمۡ ثُمَّ جَآءُوكَ يَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ إِنۡ أَرَدۡنَآ إِلَّآ إِحۡسَٰنٗا وَتَوۡفِيقًا

Transliteration: (Fakaifa izaaa asaabathum museebatum bimaa qaddamat aideehim summa jaaa'ooka yahlifoona billaahi in aradnaaa illaaa ihsaananw wa tawfeeqaa)

तो उस वक़्त क्या हाल होता है जब उनके हाथों के करतूतों की वजह से उन पर कोई मुसीबत आ पड़ती है, फिर वे आपके पास अल्लाह की क़समें खाते हुए आते हैं कि: 'हमारा इरादा तो सिर्फ़ भलाई और बाहमी मेल-मिलाप का था?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 62

✅ मुनाफ़िक़ों की मुसीबत और झूठी क़समें

जब मुनाफ़िक़ीन बातिल फ़ैसलों और अपनी साज़िशों में पकड़े जाते हैं, तो अपनी चालाकी छुपाने के लिए झूठी क़समें खाकर रसूलुल्लाह (सल्ल.) के सामने भलाई का ढोंग रचते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now