कुरान - 4:64 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا لِيُطَاعَ بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَلَوۡ أَنَّهُمۡ إِذ ظَّلَمُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ جَآءُوكَ فَٱسۡتَغۡفَرُواْ ٱللَّهَ وَٱسۡتَغۡفَرَ لَهُمُ ٱلرَّسُولُ لَوَجَدُواْ ٱللَّهَ تَوَّابٗا رَّحِيمٗا

Transliteration: (Wa maa arsalnaa mir Rasoolin illaa liyutaa'a bi iznil laah; wa law annahum 'iz zalamooo anfusahum jaaa'ooka fastaghfarul laaha wastaghfara lahumur Rasoolu la wajadul laaha Tawwaabar Raheemaa)

और हमने जो रसूल भी भेजा वह इसीलिए भेजा कि अल्लाह के हुक्म से उसकी इताअत की जाए; और अगर वे लोग, जब उन्होंने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया था, आपके पास आ जाते और अल्लाह से मग़फ़िरत मांगते और रसूल भी उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ फ़रमाते, तो वे ज़रूर अल्लाह को बड़ा तौबा क़बूल करने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला पाते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 64

✅ मक़ामे मुस्तफ़ा और शफ़ाअत की अज़मत

यह आयत रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के वसीले और बारगाहे नबवी की अज़मत का वाज़ेह सुबूत है कि जब गुनाहगार हुज़ूर की बारगाह में हाज़िर होकर तौबा करते हैं और रसूल उनके लिए मग़फ़िरत की शफ़ाअत फ़रमाते हैं, तो अल्लाह उनकी तौबा क़बूल फ़रमाता है।

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