कुरान - 4:63 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ يَعۡلَمُ ٱللَّهُ مَا فِي قُلُوبِهِمۡ فَأَعۡرِضۡ عَنۡهُمۡ وَعِظۡهُمۡ وَقُل لَّهُمۡ فِيٓ أَنفُسِهِمۡ قَوۡلَۢا بَلِيغٗا

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena ya'la mullaahu maa fee quloobihim fa a'rid 'anhum wa 'izhum wa qul lahum feee anfusihim qawlam baleeghaa)

ये वे लोग हैं जिनके दिलों की बात को अल्लाह ख़ूब जानता है, पस आप उनसे एअराज़ कीजिए और उन्हें नसीहत फ़रमाइए और उनसे ऐसी बात कहिए जो उनके दिलों में उतर जाए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 63

✅ दिलों के भेद और पुर-असर नसीहत

अल्लाह मुनाफ़िक़ों के खोट से बाख़बर है। नबी-ए-करीम (सल्ल.) को हुक्म दिया गया कि ज़ाहिरी तौर पर उनसे दरगुज़र फ़रमाएं मगर उन्हें ऐसी पुरअसर और दिलकश नसीहत करें जो उनकी रूह को झकझोर दे।

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