Transliteration: (Laa yastawil qaa'idoona Minal mu'mineena ghairu uliddarari walmujaahidoona fee sabeelil laahi bi amwaalihim wa anfusihim; faddalal laahul mujaahideena bi amwaalihim wa anfusihim 'alalqaa'ideena darajah; wa kullanw wa'adal laahul husnaa; wa faddalal laahul mujaahideena 'alal qaa'ideena ajran 'azeemaa)
"पीछे बैठना" का मतलब है — जिहाद से दूर रहना उस वक़्त जब यह फ़र्ज़-ए-ऐन (हर मुसलमान पर लाज़िम) न हो।
अल्लाह की राह में कोशिश करने में शामिल है:
जब आयत का पहला हिस्सा नाज़िल हुआ, तो हज़रत अब्दुल्लाह बिन उम्मे मक्तूम (रज़ि.), जो नाबिना थे, ने पूछा:
"या रसूलल्लाह ﷺ! मैं जैसे लोग जिहाद कैसे कर सकते हैं?"
इस पर अल्लाह ने "बिना किसी सही वजह" वाला हिस्सा नाज़िल किया, ताकि अपंग, बीमार और मजबूर लोग शरीअत में छूट पा सकें।
यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का सबूत है।
इस आयत से साबित होता है:
हदीस में आता है:
अल्लाह तआला मुजाहिद को जन्नत में सौ दर्जे देगा, और हर दर्जे के बीच का फ़ासला आसमान और ज़मीन जितना होगा।
यह दिखाता है कि जो लोग सच्चाई से अल्लाह की राह में कोशिश करते हैं, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में बुलंद मक़ाम मिलता है।
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