कुरान - 24:16 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَلَوۡلَآ إِذۡ سَمِعۡتُمُوهُ قُلۡتُم مَّا يَكُونُ لَنَآ أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبۡحَٰنَكَ هَٰذَا بُهۡتَٰنٌ عَظِيمٞ

Transliteration: (Wa law laaa iz sami'tu moohu qultum maa yakoonu lanaaa an natakallama bihaazaa Subhaanaka haaza buhtaanun 'azeem)

और जब तुमने इसे सुना था, तो तुमने क्यों न कह दिया, 'हमारे लिए यह हरगिज़ जायज़ नहीं कि हम ऐसी बात अपनी ज़बान पर लाएं; सुब्हानअल्लाह (ऐ अल्लाह! तू पाक है), यह तो एक बहुत बड़ा बोहतान है [32]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 16

"और जब तुमने इसे सुना था, तो तुमने क्यों न कह दिया: 'हमारे लिए यह जायज़ नहीं कि ऐसी बात ज़बान पर लाएं; सुब्हानअल्लाह! यह तो एक बहुत बड़ा बोहतान है [32]!'"

[32] बोहतान सुनते ही मोमिन का सहीह तर्ज़े-अमल

मोमिन का फ़रीज़ा यह था कि सुनते ही अपनी ज़बान बंद कर लेता और अल्लाह की पाकी बयान करके इस अफ़वाह को सिरे से रद्द कर देता। किसी नेक इंसान की आबरू पर कीचड़ उछालते वक़्त ख़ामोश तमाशाई बनना भी गुनाह में शरीक होने के मुतरादिफ़ है।

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