कुरान - 24:17 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
يَعِظُكُمُ ٱللَّهُ أَن تَعُودُواْ لِمِثۡلِهِۦٓ أَبَدًا إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Ya'izukumul laahu an ta'oodoo limisliheee abadan in kuntum mu'mineen)

अल्लाह तुम्हें नसीहत करता है कि अगर तुम मोमिन हो, तो कभी दोबारा ऐसी हरकत हरगिज़ न करना [33]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 17

"अल्लाह तुम्हें नसीहत करता है कि अगर तुम मोमिन हो, तो कभी दोबारा ऐसी हरकत हरगिज़ न करना [33]।"

[33] अहले ईमान को क़तई तंबीह और अज़ीम नसीहत

अल्लाह तआला ने ईमान की शर्त लगाकर फ़रमाया कि अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो आइंदा कभी ऐसी जुर्रत न करना। उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की पाकदामनी पर अब क़ुरआन की मुहर लग चुकी है। अइम्मा-ए-दीन का इज्माअ है कि जो शख़्स क़ुरआन के इस फ़ैसले के बाद भी हज़रत आयशा पर तोहमत लगाए या शक करे, वह क़ुरआन का मुनकिर होकर दायरा-ए-इस्लाम से ख़ारिज (काफ़िर) है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now