कुरान - 24:19 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ ٱلۡفَٰحِشَةُ فِي ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۚ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ وَأَنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Innal lazeena yuhibboona an tashee'al faahishatu fil lazeena aamanoo lahum 'azaabun aleemun fid dunyaa wal Aakhirah; wallaahu ya'lamu wa antum laa ta'lamoon)

बेशक जो लोग यह पसंद करते हैं कि ईमान वालों में बेहयाई (बदचलनी की अफ़वाह) फैले [35], उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है; और अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 19

"बेशक जो लोग यह पसंद करते हैं कि ईमान वालों में बेहयाई फैले [35], उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है; और अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।"

[35] बेहयाई और बदचलनी फैलाने वालों के लिए सख़्त वईद

यह आयत उन बदबख़्तों के लिए दर्दनाक अज़ाब की वईद सुनाती है जो मुसलमानों के मुआशरे में बेहयाई, फ़हश और बदचलनी की अफ़वाहों को फैलाना पसंद करते हैं। मुआशरे में अख़लाक़ी बिगाड़ पैदा करना और बेगुनाहों पर तोहमतें तराशना अज़ाब-ए-इलाही को दावत देना है।

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