कुरान - 24:20 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَلَوۡلَا فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَرَحۡمَتُهُۥ وَأَنَّ ٱللَّهَ رَءُوفٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Wa law laa fadlul laahi 'alaikum wa rahmatuhoo wa annal laaha Ra'oofur Raheem (section 2))

और अगर तुम पर अल्लाह का फ़ज़्ल और उसकी रहमत [36] न होती (तो तुम हलाक हो जाते); और यह कि अल्लाह निहायत शफ़क़त फ़रमाने वाला, बड़ा मेहरबान है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 20

"और अगर तुम पर अल्लाह का फ़ज़्ल और उसकी रहमत [36] न होती... और यह कि अल्लाह निहायत शफ़क़त फ़रमाने वाला, मेहरबान है।"

[36] इलाही रहमत ने बेमिसाल अज़ाब को टाला

यह आयत फिर याद दिलाती है कि हज़रत रसूल-ए-अकरम ﷺ और उम्मुल मोमिनीन की अज़मत पर हमला कोई मामूली बात न थी। अगर अल्लाह की ख़ास शफ़क़त (रऊफ़ियत) और रहमत न होती तो ऐसा अज़ाब नाज़िल होता जिसकी मिसाल न मिलती। अल्लाह ने अपने फ़ज़्ल से मुसलमानों को तौबा की तौफ़ीक़ दी और माफ़ फ़रमाया।

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