Transliteration: (Wa law laa fadlul laahi 'alaikum wa rahmatuhoo fiddunyaa wal aakhirati lamassakum fee maaa afadtum feehi 'azaabun 'azeem)
"और अगर दुनिया और आख़िरत में तुम पर अल्लाह का फ़ज़्ल और उसकी रहमत न होती, तो जिन बातों में तुम पड़ गए थे उस पर तुम्हें कोई बड़ा अज़ाब आ पकड़ता [29];"
अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि अगर उसका फ़ज़्ल व करम शामिल-ए-हाल न होता, तो रसूलुल्लाह ﷺ के अहले-बैत की शान में जो गुस्ताख़ी और अफ़वाहबाज़ी तुमने की थी, उस पर दुनिया और आख़िरत में तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल हो जाता। यह सिर्फ़ अल्लाह की रहमत थी जिसने तौबा की मोहलत दी और अज़ाब को रोक लिया।
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