कुरान - 24:12 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
لَّوۡلَآ إِذۡ سَمِعۡتُمُوهُ ظَنَّ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتُ بِأَنفُسِهِمۡ خَيۡرٗا وَقَالُواْ هَٰذَآ إِفۡكٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Law laaa iz sami'tumoohu zannal mu'minoona walmu'minaatu bi anfusihim khairanw wa qaaloo haazaaa ifkum mubeen)

जब तुमने इसे सुना था, तो मोमिन मर्दों और मोमिन औरतों ने अपने लोगों के बारे में अच्छा गुमान क्यों न किया, और क्यों न कह दिया कि 'यह तो खुला बोहतान है' [27]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 12

"जब तुमने इसे सुना था, तो मोमिन मर्दों और मोमिन औरतों ने अपने लोगों के बारे में अच्छा गुमान क्यों न किया, और क्यों न कह दिया कि 'यह तो खुला बोहतान है' [27]?"

[27] हुस्ने ज़न और खुले बोहतान की फ़ौरी तरदीद का फ़रीज़ा

इस आयत में उन अहले-ईमान को तंबीह व सरज़निश की गई जो बोहतान सुनकर ख़ामोश रहे या तवक्क़ुफ़ किया। मोमिन की शान यह होनी चाहिए थी कि जैसे ही उम्मुल मोमिनीन के बारे में ऐसी वाहियात बात सुनी, फ़ौरन हुस्ने ज़न रखते और दो-टोक कहते: 'यह तो खुला बोहतान है!'

जैसे हज़रत अबू अय्यूब अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनकी अहलिया ने सुनते ही कहा था: 'सुब्हानअल्लाह! हम ऐसा नहीं सोच सकते तो रसूलुल्लाह ﷺ की अहलिया तो हमसे कहीं आला व पाकीज़ा हैं!'

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