Transliteration: (Law laa jaaa'oo 'alaihi bi-arba'ati shuhadaaa'; fa iz lam yaatoo bishshuhadaaa'i fa ulaaa 'ika 'indal laahi humul kaaziboon)
"वे इस पर चार गवाह क्यों न लाए? पस जब वे गवाह नहीं लाए, तो अल्लाह के नज़दीक वही लोग झूठे हैं [28]।"
क़ुरआन-ए-पाक ने क़ानून-ए-अदल का बुनियादी उसूल मुक़र्रर फ़रमाया कि जब मुत्तहम करने वाले चार गवाह पेश न कर सके, तो अल्लाह के क़ानून में वे क़तई तौर पर झूठे हैं। किसी की पाकीज़गी और आबरू पर बिना शरई शहादत के कीचड़ उछालना सरासर कुफ़्र व कज़िब है।
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