कुरान - 24:59 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَإِذَا بَلَغَ ٱلۡأَطۡفَٰلُ مِنكُمُ ٱلۡحُلُمَ فَلۡيَسۡتَـٔۡذِنُواْ كَمَا ٱسۡتَـٔۡذَنَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمۡ ءَايَٰتِهِۦۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ

Transliteration: (Wa izaa balaghal atfaalu minkumul huluma fal yasta’zinoo kamas ta’zanal lazeena min qablihim; kazaalika yubaiyinul laahu lakum Aayaatih; wallaahu ‘Aleemun Hakeem)

और जब तुम्हारे बच्चे बुलूग़त (जवानी) की उम्र को पहुंच जाएं, तो उन्हें भी उसी तरह इजाज़त मांगनी चाहिए [159] जिस तरह उनसे पहले के लोग इजाज़त मांगते रहे हैं [160]; इसी तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतें साफ़ बयान फ़रमाता है; और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 59

"और जब बच्चे बुलूग़त को पहुंच जाएं, तो वे भी उसी तरह इजाज़त मांगें [159] जैसे उनसे पहले के लोग मांगते रहे हैं [160]; इसी तरह अल्लाह अपनी आयतें साफ़ बयान फ़रमाता है।"

[159-160] बालिग़ बच्चों के लिए मुस्तक़िल इजाज़त का हुक्म

जब बच्चे बालिग़ हो जाएं, तो अब वे तीन मख़्सूस औक़ात तक महदूद नहीं रहेंगे बल्कि हर वक़्त वालिदैन के कमरे में जाने से पहले इजाज़त मांगना उन पर फ़र्ज़ होगा, जैसे दूसरे बड़े लोग इजाज़त तलब करते हैं। यह तरबियत इंसान को बा-हया और संजीदा बनाती है।

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