Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo li yasta’zinkumul lazeena malakat aimaanukum wallazeena lam yablughul huluma minkum salaasa marraat; min qabli Salaatil Fajri wa heena tada’oona siyaa bakum minaz zaheerati wa min ba’di Salaatil Ishaaa’; salaasu ‘awraatil lakum; laisa ‘alaikum wa laa ‘alaihim junaahun ba’dahunn; tawwaafoona ‘alaikum ba’dukum ‘alaa ba’d; kazaalika yubaiyinul laahu lakumul aayaat; wallahu ‘Aleemun Hakeem)
"ऐ ईमान वालो! तुम्हारे ज़ेर-दस्त [151] और नाबालिग़ बच्चे [153] तीन वक़्तों में इजाज़त लिया करें: फ़ज्र से पहले [152], दोपहर को जब कपड़े उतारते हो [154], और इशा के बाद [155]; ये पर्दे के तीन वक़्त हैं [156]... इनके अलावा गुनाह नहीं [157]... अल्लाह जानने वाला, हकीम है [158]।"
इस्लाम ने घर के अंदर भी हया और पाकीज़गी की ऐसी तालीम दी कि ग़ुलामों, बांदियों और समझदार नाबालिग़ बच्चों को भी वालिदैन के ख़ास कमरों में बिला-इजाज़त आने से रोका।
ये तीन औक़ात इंसानी आराम और तन्हाई के हैं:
फ़ज्र से पहले [152] जब इंसान सो कर उठता है,
दोपहर का क़ैलूला [154] जब गर्मी की वजह से लिबास हल्का किया जाता है, और
इशा के बाद [155] जो रात के आराम और सोहबत का वक़्त है।
इन औक़ात में बिला-दस्तक दाख़िल होने से बे-पर्दगी का अंदेशा होता है, इसलिए इजाज़त लाज़िम की गई।
इन तीन औक़ात के अलावा घरेलू काम-काज की कसरत की वजह से इजाज़त की पाबंदी नहीं है ताकि तंगी न हो। शरीअत ने हया और सहूलत का अज़ीम तवाज़ुन क़ाइम फ़रमाया है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat