Transliteration: (Wa aqeemus Salaata wa aatuz Zakaata wa atee'ur Rasoola la'allakum turhamoon)
"और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो और रसूल की इताअत करो ताकि तुम पर रहम किया जाए [149]।"
अल्लाह की ख़ास रहमत और हुकूमत व इज़्ज़त की बक़ा के लिए तीन चीज़ें लाज़िम फ़रमाईं: (1) नमाज़ की पाबंदी जो बदनी इबादत है, (2) ज़कात की अदायगी जो माली इबादत है, और (3) हुज़ूर अकरम ﷺ की मुकम्मल फ़रमांबरदारी जो तमाम आमाल की रूह है।
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