कुरान - 24:56 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ

Transliteration: (Wa aqeemus Salaata wa aatuz Zakaata wa atee'ur Rasoola la'allakum turhamoon)

और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो और रसूल की इताअत करो ताकि तुम पर रहम किया जाए [149]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 56

"और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो और रसूल की इताअत करो ताकि तुम पर रहम किया जाए [149]।"

[149] रहमत-ए-इलाही के हुसूल के तीन सुतून

अल्लाह की ख़ास रहमत और हुकूमत व इज़्ज़त की बक़ा के लिए तीन चीज़ें लाज़िम फ़रमाईं: (1) नमाज़ की पाबंदी जो बदनी इबादत है, (2) ज़कात की अदायगी जो माली इबादत है, और (3) हुज़ूर अकरम ﷺ की मुकम्मल फ़रमांबरदारी जो तमाम आमाल की रूह है।

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