Transliteration: (Qul atee'ul laaha wa atee'ur Rasoola fa in tawallaw fa innamaa 'alaihi maa hummila wa 'alaikum maa hummiltum wa in tutee'oohu tahtadoo; wa maa'alar Rasooli illal balaaghul mubeen)
"कह दीजिए: 'अल्लाह और रसूल की इताअत करो [140];' अगर मुंह मोड़ोगे, तो रसूल पर वही है जो उन पर डाला गया [141], और तुम पर तुम्हारी ज़िम्मेदारी है; इताअत करोगे तो हिदायत पा जाओगे [142]; और रसूल के ज़िम्मे सिर्फ़ साफ़ पहुंचा देना है [143]।"
रसूल की ज़िम्मेदारी अहकाम-ए-इलाही को पूरी अमानत व वज़ाहत के साथ पहुंचा देना है जो हुज़ूर ﷺ ने ब-अहसन तरीक़ा अंजाम दी। अब हिदायत क़बूल करना या मुंह मोड़ना लोगों का अपना अमल है जिसका हिसाब उन्हें ख़ुद देना होगा।
जो शख़्स रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत और फ़रमान की पैरवी करेगा वही सिरात-ए-मुस्तक़ीम पाएगा। रसूल का काम जब्र करना नहीं बल्कि हक़ की वाज़ेह रहनुमाई फ़रमाना है।
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