कुरान - 24:54 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
قُلۡ أَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَۖ فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنَّمَا عَلَيۡهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيۡكُم مَّا حُمِّلۡتُمۡۖ وَإِن تُطِيعُوهُ تَهۡتَدُواْۚ وَمَا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ

Transliteration: (Qul atee'ul laaha wa atee'ur Rasoola fa in tawallaw fa innamaa 'alaihi maa hummila wa 'alaikum maa hummiltum wa in tutee'oohu tahtadoo; wa maa'alar Rasooli illal balaaghul mubeen)

आप कह दीजिए, 'अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो [140];' फिर अगर तुम मुंह मोड़ोगे, तो रसूल पर तो बस वही ज़िम्मेदारी है जो उन पर डाली गई है [141], और तुम पर वह ज़िम्मेदारी है जो तुम पर डाली गई है; और अगर तुम उनकी इताअत करोगे तो हिदायत पा जाओगे [142]; और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ़ साफ़-साफ़ पहुंचा देना ही है [143]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 54

"कह दीजिए: 'अल्लाह और रसूल की इताअत करो [140];' अगर मुंह मोड़ोगे, तो रसूल पर वही है जो उन पर डाला गया [141], और तुम पर तुम्हारी ज़िम्मेदारी है; इताअत करोगे तो हिदायत पा जाओगे [142]; और रसूल के ज़िम्मे सिर्फ़ साफ़ पहुंचा देना है [143]।"

[140-141] तबलीग़ और अमल की ज़िम्मेदारी

रसूल की ज़िम्मेदारी अहकाम-ए-इलाही को पूरी अमानत व वज़ाहत के साथ पहुंचा देना है जो हुज़ूर ﷺ ने ब-अहसन तरीक़ा अंजाम दी। अब हिदायत क़बूल करना या मुंह मोड़ना लोगों का अपना अमल है जिसका हिसाब उन्हें ख़ुद देना होगा।

[142-143] इताअत-ए-रसूल ही अस्ल हिदायत

जो शख़्स रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत और फ़रमान की पैरवी करेगा वही सिरात-ए-मुस्तक़ीम पाएगा। रसूल का काम जब्र करना नहीं बल्कि हक़ की वाज़ेह रहनुमाई फ़रमाना है।

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