Transliteration: (Wa aqsamoo billaahi jahda aimaanihim la'in amartahum la yakhrujunna qul laa tuqsimoo taa'atum ma'roofah innal laaha khabeerum bimaa ta'maloon)
"और उन्होंने सख़्त क़समें खाईं कि अगर हुक्म दें तो ज़रूर निकल खड़े होंगे [138]; कह दीजिए: 'क़समें मत खाओ; जानी-पहचानी इताअत दरकार है; बेशक अल्लाह बाख़बर है' [139]।"
मुनाफ़िक़ अपनी वफ़ादारी साबित करने के लिए झूठी और सख़्त क़समें खाते थे कि आप हुक्म दें तो हम घर-बार छोड़कर जंग के लिए निकल पड़ेंगे।
अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि झूठी क़समें खाने की ज़रूरत नहीं, इस्लाम में खोखले दावों के बजाए दिल का इख़्लास और रोज़मर्रा की अमली इताअत मतलूब है। अल्लाह तुम्हारी नीयतों को ख़ूब जानता है।
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