कुरान - 24:53 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
۞وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَئِنۡ أَمَرۡتَهُمۡ لَيَخۡرُجُنَّۖ قُل لَّا تُقۡسِمُواْۖ طَاعَةٞ مَّعۡرُوفَةٌۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa aqsamoo billaahi jahda aimaanihim la'in amartahum la yakhrujunna qul laa tuqsimoo taa'atum ma'roofah innal laaha khabeerum bimaa ta'maloon)

और उन्होंने अल्लाह की सख़्त-सख़्त क़समें खाईं कि अगर आप उन्हें हुक्म दें तो वे ज़रूर (जिहाद के लिए) निकल खड़े होंगे [138]; आप कह दीजिए, 'क़समें मत खाओ; जानी-पहचानी इताअत ही दरकार है; बेशक तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उससे ख़ूब बाख़बर है' [139]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 53

"और उन्होंने सख़्त क़समें खाईं कि अगर हुक्म दें तो ज़रूर निकल खड़े होंगे [138]; कह दीजिए: 'क़समें मत खाओ; जानी-पहचानी इताअत दरकार है; बेशक अल्लाह बाख़बर है' [139]।"

[138] मुनाफ़िक़ों की झूठी क़समें

मुनाफ़िक़ अपनी वफ़ादारी साबित करने के लिए झूठी और सख़्त क़समें खाते थे कि आप हुक्म दें तो हम घर-बार छोड़कर जंग के लिए निकल पड़ेंगे।

[139] खोखली बातों के बजाए अमली इताअत

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि झूठी क़समें खाने की ज़रूरत नहीं, इस्लाम में खोखले दावों के बजाए दिल का इख़्लास और रोज़मर्रा की अमली इताअत मतलूब है। अल्लाह तुम्हारी नीयतों को ख़ूब जानता है।

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