Transliteration: (Wa'adal laahul lazeena aamanoo minkum wa 'amilus saalihaati la yastakhlifan nahum fil ardi kamastakh lafal lazeena min qablihim wa la yumakkinanna lahum deenahumul lazir tadaa lahum wa la yubaddilannahum mim ba'di khawfihim amnaa; ya'budoonanee laayushrikoona bee shai'aa; wa man kafara ba'da zaalika fa ulaaa'ika humul faasiqoon)
"अल्लाह ने ईमान वालों और नेक आमाल वालों से वादा फ़रमाया [144] कि उन्हें ज़मीन में ज़रूर ख़लीफ़ा बनाएगा [145] जैसा कि पहले लोगों को बनाया [146], और दीन को मज़बूत करेगा, और ख़ौफ़ को अमन में बदल देगा [147]... जो नाशुक्री करे वही फ़ासिक़ है [148]।"
यह आयत अहले सुन्नत व जमाअत के नज़दीक ख़िलाफ़त-ए-राशिदा (हज़रत अबू बक्र, उमर, उसमान और अली रज़ियल्लाहु अन्हुम) की हक़्क़ानियत की सबसे बड़ी क़ुरआनी सनद है। अल्लाह ने वादा फ़रमाया था कि सहाबा-ए-किराम को ज़मीन में ख़िलाफ़त व हुकूमत अता फ़रमाएगा।
अल्लाह ने इस वादे को पूरा फ़रमाया: क़ैसर व किसरा की सल्तनतें फ़तह हुईं, इस्लाम पूरी दुनिया में ग़ालिब हुआ, और मुसलमानों की इब्तिदाई बेबसी व ख़ौफ़ को बेमिसाल अमन और बादशाही में बदल दिया गया।
इस अज़ीम इलाही नेअमत और सहाबा-ए-किराम की ख़िलाफ़त का इन्कार करना या नाशुक्री करना फ़िसक़ और गुमराही है।
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