कुरान - 24:55 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَيَسۡتَخۡلِفَنَّهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ كَمَا ٱسۡتَخۡلَفَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ وَلَيُمَكِّنَنَّ لَهُمۡ دِينَهُمُ ٱلَّذِي ٱرۡتَضَىٰ لَهُمۡ وَلَيُبَدِّلَنَّهُم مِّنۢ بَعۡدِ خَوۡفِهِمۡ أَمۡنٗاۚ يَعۡبُدُونَنِي لَا يُشۡرِكُونَ بِي شَيۡـٔٗاۚ وَمَن كَفَرَ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَٰسِقُونَ

Transliteration: (Wa'adal laahul lazeena aamanoo minkum wa 'amilus saalihaati la yastakhlifan nahum fil ardi kamastakh lafal lazeena min qablihim wa la yumakkinanna lahum deenahumul lazir tadaa lahum wa la yubaddilannahum mim ba'di khawfihim amnaa; ya'budoonanee laayushrikoona bee shai'aa; wa man kafara ba'da zaalika fa ulaaa'ika humul faasiqoon)

अल्लाह ने उन लोगों से वादा फ़रमाया है जो तुम में से ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए [144] कि वह उन्हें ज़मीन में ज़रूर ख़लीफ़ा (हुक्मरान व जांनशीन) बनाएगा [145] जैसा कि उसने उनसे पहले के लोगों को ख़लीफ़ा बनाया था [146], और उनके लिए उनके उस दीन को ज़रूर मज़बूत व ग़ालिब कर देगा जिसे उसने उनके लिए पसंद फ़रमाया है, और उनके ख़ौफ़ के बाद ज़रूर उसे अमन व सुकून में बदल देगा [147]; वे मेरी ही इबादत करेंगे, मेरे साथ किसी को शरीक नहीं ठहराएंगे; और जो कोई इसके बाद भी नाशुक्री व कुफ़्र करे, तो वही लोग फ़ासिक़ (नाफ़रमान) हैं [148]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 55 (आयते इस्तिख़लाफ़)

"अल्लाह ने ईमान वालों और नेक आमाल वालों से वादा फ़रमाया [144] कि उन्हें ज़मीन में ज़रूर ख़लीफ़ा बनाएगा [145] जैसा कि पहले लोगों को बनाया [146], और दीन को मज़बूत करेगा, और ख़ौफ़ को अमन में बदल देगा [147]... जो नाशुक्री करे वही फ़ासिक़ है [148]।"

[144-145] ख़िलाफ़त-ए-राशिदा की हक़्क़ानियत की क़ुरआनी दलील

यह आयत अहले सुन्नत व जमाअत के नज़दीक ख़िलाफ़त-ए-राशिदा (हज़रत अबू बक्र, उमर, उसमान और अली रज़ियल्लाहु अन्हुम) की हक़्क़ानियत की सबसे बड़ी क़ुरआनी सनद है। अल्लाह ने वादा फ़रमाया था कि सहाबा-ए-किराम को ज़मीन में ख़िलाफ़त व हुकूमत अता फ़रमाएगा।

[146-147] दीन का ग़लबा और ख़ौफ़ का अमन में बदलना

अल्लाह ने इस वादे को पूरा फ़रमाया: क़ैसर व किसरा की सल्तनतें फ़तह हुईं, इस्लाम पूरी दुनिया में ग़ालिब हुआ, और मुसलमानों की इब्तिदाई बेबसी व ख़ौफ़ को बेमिसाल अमन और बादशाही में बदल दिया गया।

[148] नेअमत-ए-ख़िलाफ़त की नाशुक्री का अंजाम

इस अज़ीम इलाही नेअमत और सहाबा-ए-किराम की ख़िलाफ़त का इन्कार करना या नाशुक्री करना फ़िसक़ और गुमराही है।

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