कुरान - 24:57 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
لَا تَحۡسَبَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ وَمَأۡوَىٰهُمُ ٱلنَّارُۖ وَلَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

Transliteration: (Laa tahsabannal lazeena kafaroo mu'jizeena fil ard; wa maawaahumun Naaru wa labi'sal maseer (section 7))

आप हरगिज़ यह ख़्याल न करें कि काफ़िर लोग ज़मीन में (अल्लाह को) बेबस कर देंगे [150]; और उनका ठिकाना दोज़ख़ की आग है; और बेशक वह बहुत ही बुरा ठिकाना है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 57

"हरगिज़ ख़्याल न करें कि काफ़िर ज़मीन में बेबस कर देंगे [150]; उनका ठिकाना आग है; और बेशक वह बहुत बुरा ठिकाना है!"

[150] कुफ़्र की बेबसी और जहन्नम का दायमी ठिकाना

काफ़िर चाहे दुनिया में कितनी ही ताक़त व लशकर जमा कर लें, वे अल्लाह के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत से बाहर नहीं निकल सकते और न ही उसके दीन के रास्ते में रुकावट बन सकते हैं। बिल-आख़िर उनका अंजाम जहन्नम की भड़कती हुई आग है जो सबसे बदतरीन ठिकाना है।

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