Transliteration: (Wa mai yuti'il laaha wa Rasoolahoo wa yakhshal laaha wa yattaqhi fa ulaaa'ika humul faaa'izoon)
"और जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे, अल्लाह से डरे और तक़वा इख़्तियार करे, तो वही लोग कामयाब हैं [137]।"
इस आयत में कामियाबी के चार बुनियादी उसूल बयान हुए: (1) अल्लाह की इताअत, (2) रसूल की इताअत, (3) गुज़िश्ता गुनाहों पर अल्लाह का ख़ौफ़, और (4) आइंदा ज़िन्दगी में गुनाहों से बचने के लिए तक़्वा। जो इन पर अमल करे वह जन्नत का हक़दार है।
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