कुरान - 24:52 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
وَمَن يُطِعِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَخۡشَ ٱللَّهَ وَيَتَّقۡهِ فَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَآئِزُونَ

Transliteration: (Wa mai yuti'il laaha wa Rasoolahoo wa yakhshal laaha wa yattaqhi fa ulaaa'ika humul faaa'izoon)

और जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे, और अल्लाह से डरे और उसका तक़वा इख़्तियार करे, तो वही लोग मुराद पाने वाले (कामयाब) हैं [137]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 52

"और जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे, अल्लाह से डरे और तक़वा इख़्तियार करे, तो वही लोग कामयाब हैं [137]।"

[137] कामियाबी के चार सुतून

इस आयत में कामियाबी के चार बुनियादी उसूल बयान हुए: (1) अल्लाह की इताअत, (2) रसूल की इताअत, (3) गुज़िश्ता गुनाहों पर अल्लाह का ख़ौफ़, और (4) आइंदा ज़िन्दगी में गुनाहों से बचने के लिए तक़्वा। जो इन पर अमल करे वह जन्नत का हक़दार है।

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