कुरान - 37:11 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
فَٱسۡتَفۡتِهِمۡ أَهُمۡ أَشَدُّ خَلۡقًا أَم مَّنۡ خَلَقۡنَآۚ إِنَّا خَلَقۡنَٰهُم مِّن طِينٖ لَّازِبِۭ

Transliteration: (Fastaftihim ahum ashaddu khalqan am man khalaqnaa; innaa khalaqnaahum min teenil laazib)

पस आप उनसे पूछिए [12]: क्या उनकी पैदाइश ज़्यादा मुश्किल है या उन चीज़ों की जिन्हें हमने पैदा किया है? बेशक [13] हमने उन्हें चिपचिपी गारी (मिट्टी) से पैदा किया है [14]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 11

"पस आप उनसे पूछिए [12]: क्या उनकी पैदाइश ज़्यादा मुश्किल है या उन चीज़ों की जिन्हें हमने पैदा किया है? बेशक [13] हमने उन्हें चिपचिपी गारी से पैदा किया है [14]!"

[12] मुनकिरीन-ए-हश्र से सवालिया हुज्जत

हुज़ूर अकरम ﷺ को हुक्म दिया गया कि इन क़ियामत के मुनकिरों से पूछिए कि क्या तुम्हारा दोबारा पैदा होना ज़्यादा मुश्किल है या उन अज़ीम आसमानों, सितारों, फ़रिश्तों और कायनात का पैदा करना?

[13] हक़ीक़त की तस्दीक़

बेशक अल्लाह की कु़दरत के आगे किसी चीज़ का वजूद में लाना मुश्किल नहीं।

[14] चिपचिपी मिट्टी से हज़रत आदम की तख़्लीक़

इंसान की असल हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) हैं जिन्हें अल्लाह ने चिपचिपी गारी और मिट्टी से पैदा किया। जो ज़ात मिट्टी के पुतले में रूह फूँक सकती है, उसके लिए मरे हुए इंसानों को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल होगा!

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now