कुरान - 37:143 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

143
فَلَوۡلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلۡمُسَبِّحِينَ

Transliteration: (Falaw laaa annahoo kaana minal musabbiheen)

पस अगर वे (अल्लाह की) तस्बीह करने वालों में से न होते [145], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 143 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 143

"पस अगर वे तस्बीह करने वालों में से न होते [145],"

[145] कलिमा-ए-तन्ज़ीह और तस्बीह-ए-यूनुस

मछली के पेट की तारीकियों में हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने लगातार यह तस्बीह पढ़ी: "ला इलाहा इल्ला अन्ता सुब्हानका इन्नी कुन्तु मिनज़-ज़ालिमीन"। उनकी इस तस्बीह और ज़िक्र की बरकत से अल्लाह ने उनके लिए मछली के पेट को सलामती का ज़रिया बना दिया।

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