Transliteration: (Illaa man huwa saalil jaheem)
"मगर उसी को जो भड़कती आग (जहन्नम) में जाने वाला हो [163]।"
इस आयत से हम सीखते हैं कि जिस बंदे पर अल्लाह तआला अपनी रहमत और हिदायत नाज़िल फ़रमा दे, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।
यही वजह है कि अंबिया-ए-किराम मासूम अनुल ख़ता (गुनाहों से बिल्कुल पाक) हैं और औलिया-ए-इज़ाम महफ़ूज़ हैं।
इसके बरअक्स, जहन्नम के मुस्तहिक़ वही लोग हैं जो जानबूझकर अल्लाह की हिदायत को ठुकराते हैं और अपनी बद-आमाली के सबब हमेशा के अज़ाब के हक़दार बन जाते हैं।
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