कुरान - 37:163 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

163
إِلَّا مَنۡ هُوَ صَالِ ٱلۡجَحِيمِ

Transliteration: (Illaa man huwa saalil jaheem)

मगर उसी को जो भड़कती आग (जहन्नम) में जाने वाला हो [163]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 163 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 163

"मगर उसी को जो भड़कती आग (जहन्नम) में जाने वाला हो [163]।"

[163] बद-बख़्तों की गुमराही और हिफ़ाज़ते अहले हक़

इस आयत से हम सीखते हैं कि जिस बंदे पर अल्लाह तआला अपनी रहमत और हिदायत नाज़िल फ़रमा दे, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।

यही वजह है कि अंबिया-ए-किराम मासूम अनुल ख़ता (गुनाहों से बिल्कुल पाक) हैं और औलिया-ए-इज़ाम महफ़ूज़ हैं।

इसके बरअक्स, जहन्नम के मुस्तहिक़ वही लोग हैं जो जानबूझकर अल्लाह की हिदायत को ठुकराते हैं और अपनी बद-आमाली के सबब हमेशा के अज़ाब के हक़दार बन जाते हैं।

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