कुरान - 37:164 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

164
وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٞ مَّعۡلُومٞ

Transliteration: (Wa maa minnaaa illaa lahoo maqaamun ma'loom)

और फ़रिश्ते कहते हैं: हममें से हर एक का एक मक़ाम मालूम है [164], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 164 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 164

"और फ़रिश्ते कहते हैं: हममें से हर एक का एक मक़ाम मालूम है [164],"

[164] फ़रिश्तों के मक़ामात और उनकी इबादत

मुशरिकीन फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहते थे। यह आयत उनका रद्द फ़रमाती है कि फ़रिश्ते एलान करते हैं कि वे अल्लाह के आजिज़ बंदे हैं और हर फ़रिश्ते का एक मुक़र्रर मक़ाम और दर्जा है जहाँ वह अल्लाह की इबादत में मसरूफ़ रहता है।

हर फ़रिश्ते की इबादत और ख़िदमत मुअय्यन है: बाज़ फ़रिश्ते दायमी रुकूअ में हैं, बाज़ हमेशा सज्दे में सर-बजूद हैं, और बाज़ क़ियाम व तस्बीह में। जो फ़रिश्ते अल्लाह तआला के ख़ास मुक़र्रब हैं (जैसे जिब्रईल व मीकाईल अलैहिमुस्सलाम) उनका मक़ाम दूसरों से जुदा और बुलंद है।

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