कुरान - 37:165 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

165
وَإِنَّا لَنَحۡنُ ٱلصَّآفُّونَ

Transliteration: (Wa innaa lanah nus saaffoon)

और बेशक हम ही सफ़ बांधने वाले हैं [165], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 165 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 165

"और बेशक हम ही सफ़ बांधने वाले हैं [165],"

[165] फ़रिश्तों की सफ़-बंदी और इताअत

यह आयत मुबारका बयान करती है कि फ़रिश्ते अल्लाह के हुक्म की तामील के लिए बा-अदब और मुस्तइद खड़े रहते हैं, अपने पर फैलाए हुक्मे रब्बी के इंतिज़ार में हाज़िर रहते हैं।

या इसका मफ़हूम यह है कि फ़रिश्ते इबादत में सीधी और मुनज़्ज़म सफ़ें बांध कर खड़े होते हैं।

इससे हमें दर्स मिलता है कि नमाज़ (सलात) में और जिहाद व मैदाने जंग में भी अहले ईमान को फ़रिश्तों की पैरवी करते हुए सीधी और मुस्तहकम सफ़ें बांधनी चाहिए।

यह नज़्म व ज़ब्त और इत्तिहाद दीनी आमाल और इज्तिमाई ज़िन्दगी की कामयाबी की असल रूह है।

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