कुरान - 37:34 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفۡعَلُ بِٱلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Innaa kazaalika naf'alu bil mujrimeen)

बेशक हम [34] मुजरिमों के साथ ऐसा ही करते हैं [35]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 34

"बेशक हम मुजरिमों के साथ ऐसा ही करते हैं [34, 35]!"

[34] शान-ए-किबरिया और अदले इलाही

अल्लाह तआला अपनी शान-ए-जलाल के साथ फ़रमाता है कि हमारा यह दायमी दस्तूर और इंसाफ़ है कि जो लोग हक़ के मुक़ाबले में सरकशी करेंगे, उनका अंजाम यही रुसवाई होगा।

[35] मुजरिमों की सज़ा

मुजरिमों से मुराद वे काफ़िर और मुशरिक़ हैं जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूलों की दावत को ठुकराया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now