Transliteration: (Innaa kazaalika naf'alu bil mujrimeen)
"बेशक हम मुजरिमों के साथ ऐसा ही करते हैं [34, 35]!"
अल्लाह तआला अपनी शान-ए-जलाल के साथ फ़रमाता है कि हमारा यह दायमी दस्तूर और इंसाफ़ है कि जो लोग हक़ के मुक़ाबले में सरकशी करेंगे, उनका अंजाम यही रुसवाई होगा।
मुजरिमों से मुराद वे काफ़िर और मुशरिक़ हैं जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूलों की दावत को ठुकराया।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat