कुरान - 37:35 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
إِنَّهُمۡ كَانُوٓاْ إِذَا قِيلَ لَهُمۡ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسۡتَكۡبِرُونَ

Transliteration: (Innahum kaanooo izaa qeela lahum laaa ilaaha illal laahu yastakbiroon)

बेशक जब उनसे कहा जाता था कि "अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं", तो वे तकब्बुर करते थे (घमंड से मुंह मोड़ते थे) [36]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 35

"बेशक जब उनसे कहा जाता था कि 'अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं', तो वे तकब्बुर करते थे [36];"

[36] कलिमा-ए-तौहीद के मुक़ाबले में तकब्बुर

जब मुशरिकीने मक्का से कहा जाता कि ला इलाहा इल्लल्लाह कहो और बुतों की पूजा छोड़ दो, तो वे अपनी सरदारी और झूठी शान के घमंड में कलिमा-ए-हक़ क़बूल करने से इंकार कर देते थे। यह तकब्बुर ही उनके कुफ़्र की असल जड़ था।

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