कुरान - 37:37 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
بَلۡ جَآءَ بِٱلۡحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

Transliteration: (Innakum lazaaa'iqul 'azaabil aleem)

बल्कि (ऐसा नहीं है) [38], वे तो हक़ लेकर तशरीफ़ लाए हैं और उन्होंने तमाम रसूलों की तस्दीक़ फ़रमाई है [39]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 37

"बल्कि वे तो हक़ लेकर तशरीफ़ लाए हैं [38] और उन्होंने तमाम रसूलों की तस्दीक़ फ़रमाई है [39]!"

[38] हुज़ूर ﷺ सरापा हक़ हैं, शायरी से पाक

अल्लाह तआला ने काफ़िरों की तोहमत का दो-टोक जवाब दिया कि हुज़ूर ﷺ शायर नहीं बल्कि अल्लाह के सच्चे रसूल हैं जो सरापा हक़ और रौशन हिदायत लेकर आए हैं।

[39] पिछले तमाम रसूलों की तस्दीक़

हुज़ूर अकरम ﷺ ने पिछले तमाम अंबिया (हज़रत आदम से लेकर हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम तक) की सदाक़त की गवाही दी और उनकी तालीमात की तस्दीक़ फ़रमाई। दुनिया में पिछले अंबिया की अज़मत और पहचान हुज़ूर ﷺ की तस्दीक़ ही के वसीले से महफ़ूज़ हुई।

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