कुरान - 37:36 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓاْ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٖ مَّجۡنُونِۭ

Transliteration: (bal jaaa'a bilhaqqi wa saddaqal mursaleen)

और कहते थे: "क्या हम एक दीवाने शायर के कहने पर अपने माबूदों को छोड़ दें [37]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 36

"और कहते थे: 'क्या हम एक दीवाने शायर के कहने पर अपने माबूदों को छोड़ दें [37]?'"

[37] काफ़िरों की ना-ज़ेबा गुस्ताख़ी

काफ़िर हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक ज़ात पर (मआज़ल्लाह) "दीवाने शायर" का इल्ज़ाम लगाते थे। वे अपने बाप-दादा के तराशे हुए बुतों की मोहब्बत में इतने अंधे थे कि हक़ीक़ी नबी-ए-बरहक़ की अज़ीम शान को पहचानने से क़ासिर रहे।

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