Transliteration: (bal jaaa'a bilhaqqi wa saddaqal mursaleen)
"और कहते थे: 'क्या हम एक दीवाने शायर के कहने पर अपने माबूदों को छोड़ दें [37]?'"
काफ़िर हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक ज़ात पर (मआज़ल्लाह) "दीवाने शायर" का इल्ज़ाम लगाते थे। वे अपने बाप-दादा के तराशे हुए बुतों की मोहब्बत में इतने अंधे थे कि हक़ीक़ी नबी-ए-बरहक़ की अज़ीम शान को पहचानने से क़ासिर रहे।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat