कुरान - 32:10 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَقَالُوٓاْ أَءِذَا ضَلَلۡنَا فِي ٱلۡأَرۡضِ أَءِنَّا لَفِي خَلۡقٖ جَدِيدِۭۚ بَلۡ هُم بِلِقَآءِ رَبِّهِمۡ كَٰفِرُونَ

Transliteration: (Wa qaalooo 'a-izaa dalalnaa fil ardi 'a-innaa lafee khalqin jadeed; bal hum biliqaaa'i rabbihim kaafiroon)

और उन्होंने कहा, 'क्या जब हम ज़मीन में (गल-सड़ कर) गुम हो जाएंगे, तो क्या हम फिर नए सिरे से पैदा किए जाएंगे?' बल्कि वे अपने रब की मुलाक़ात ही के मुनकिर हैं [20]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 10

"और उन्होंने कहा, 'क्या जब हम ज़मीन में (गल-सड़ कर) गुम हो जाएंगे, तो क्या हम फिर नए सिरे से पैदा किए जाएंगे?' बल्कि वे अपने रब की मुलाक़ात ही के मुनकिर हैं [20]।"

[20] सवाल के पर्दे में हठधर्मी और इंकार

काफ़िरों का यह सवाल हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की ख़िदमत में ईमान लाने की नीयत से नहीं था, बल्कि महज़ हठधर्मी, इंकार और मज़ाक़ उड़ाने के तौर पर था।

उनकी अस्ल बीमारी दोबारा ज़िंदा किए जाने की ना-समझी नहीं, बल्कि अपने रब के हुज़ूर हाज़िरी और मुलाक़ात का इंकार थी, जो उनके तकब्बुर और कुफ़्र को ज़ाहिर करता है, न कि किसी सच्चे शुबहे को।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now