कुरान - 32:8 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
ثُمَّ جَعَلَ نَسۡلَهُۥ مِن سُلَٰلَةٖ مِّن مَّآءٖ مَّهِينٖ

Transliteration: (Thumma ja'ala naslahoo min sulaalatim mim maaa'immaheen)

फिर उसकी नस्ल को एक बे-क़द्र (हक़ीर) पानी के निचोड़ से चलाया [17]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 8

"फिर उसकी नस्ल को एक बे-क़द्र (हक़ीर) पानी के निचोड़ से चलाया [17];"

[17] इंसानी नस्ल की आजिज़ाना इब्तिदा

इससे मुराद नुत्फ़े का एक क़तरा है, जिसे उसकी ज़ाहिरी शक्ल-ओ-सूरत के एतबार से हक़ीर (कमज़ोर) कहा गया है।

नुत्फ़ा (मनी) ज़ाहिर में बे-क़ीमत और नापाक समझा जाता है—इसके निकलने से इंसान नापाक हो जाता है, और जब तक ग़ुस्ल न करे वह मस्जिद में दाख़िल नहीं हो सकता और न क़ुरआन-ए-पाक को छू सकता है।

ऐसी आजिज़ाना और नापाक इब्तिदा के बावजूद, अल्लाह तआला ने इंसान को अक़्ल, रूह और अज़ीम ज़िम्मेदारियों से नवाज़कर मुशर्रफ़ फ़रमाया, जो अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत-ए-तख़्लीक़ का खुला सबूत है।

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