कुरान - 32:7 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
ٱلَّذِيٓ أَحۡسَنَ كُلَّ شَيۡءٍ خَلَقَهُۥۖ وَبَدَأَ خَلۡقَ ٱلۡإِنسَٰنِ مِن طِينٖ

Transliteration: (Allazee ahsana kulla shai in khalaqa; wa bada a khalqal insaani min teen)

जिसने हर उस चीज़ को बेहतरीन बनाया [15] जिसे उसने पैदा किया, और इंसान की पैदाइश की इब्तिदा गारे (मिट्टी) से फ़रमाई [16]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 7

"जिसने हर उस चीज़ को बेहतरीन बनाया [15] जिसे उसने पैदा किया, और इंसान की पैदाइश की इब्तिदा गारे (मिट्टी) से फ़रमाई [16];"

[15] तख़्लीक़ का कामिल हुस्न और तवाज़ुन

जिस मख़्लूक़ को जो भी सूरत और शक्ल अता फ़रमाई गई, उसे बेहतरीन और सबसे मुनासिब अंदाज़ में तराशा गया।
इंसान और जानवरों का हर उज़्व (अंग) हिकमत और मक़सद के साथ जोड़ा गया है—जो अल्लाह के हुस्न-ए-कारीगरी और अज़ीम हिकमत का आईनादार है।
इस बे-ऐब तख़्लीक़ पर तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं।

[16] मिट्टी से इंसान की मुमताज़ पैदाइश

अगरचे जानवर भी मिट्टी के अज्ज़ा से पैदा किए जाते हैं, लेकिन गारे (गीली मिट्टी) से इंसान की पैदाइश अल्लाह तआला की ख़ास क़ुदरत और इंसान की इज़्ज़त को ज़ाहिर करती है।

इसका मफ़हूम यह हो सकता है:

  • हमारे जद्द-ए-अमजद हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की तख़्लीक़ गारे (मिट्टी) से की गई, या

  • हमारी पैदाइश नुत्फ़े से होती है, नुत्फ़ा ग़िज़ा से बनता है, और ग़िज़ा ज़मीन (मिट्टी) से हासिल होती है—इस तरह हमारी तख़्लीक़ का ताना-बाना मिट्टी ही से जुड़ता है।

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