कुरान - 32:5 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
يُدَبِّرُ ٱلۡأَمۡرَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ إِلَى ٱلۡأَرۡضِ ثُمَّ يَعۡرُجُ إِلَيۡهِ فِي يَوۡمٖ كَانَ مِقۡدَارُهُۥٓ أَلۡفَ سَنَةٖ مِّمَّا تَعُدُّونَ

Transliteration: (Yudabbirul amra minas samaaa'i ilal ardi thumma ya'ruju ilaihi fee yawmin kaana miqdaaruhooo alfa sanatim mimmaa ta'uddoon)

वह आसमान से ज़मीन तक (हर) काम की तद्बीर फ़रमाता है [11], फिर वह (काम) उसकी तरफ़ लौटेगा [12] एक ऐसे दिन में जिसकी मिक़दार तुम्हारी गिनती के एतबार से एक हज़ार साल है [13]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 5

"वह आसमान से ज़मीन तक (हर) काम की तद्बीर फ़रमाता है [11], फिर वह (काम) उसकी तरफ़ लौटेगा [12] एक ऐसे दिन में जिसकी मिक़दार तुम्हारी गिनती के एतबार से एक हज़ार साल है [13]।"

[11] फ़रिश्तों को उमूर की सुपुर्दगी

अल्लाह तआला ने आसमानों और ज़मीन के इंतज़ाम को फ़रिश्तों के सुपुर्द फ़रमाया है, और उनके ज़िम्मे मुख़्तलिफ़ ख़िदमात लगाई हैं।
पस हक़ीक़ी मुदब्बिर अल्लाह तआला ही है, जबकि ज़ाहिरी व मजाज़ी तद्बीर उसके मुक़र्रर किए हुए फ़रिश्तों के ज़रिए होती है।

यह आयत दूसरी आयत: "फ़ल-मुदब्बिराती अम्रा" (फिर जो कामों की तद्बीर करते हैं) (सूरह अन-नाज़िआत, आयत 5) के बिल्कुल ख़िलाफ़ नहीं है।
इसी तरह दुनियावी मुआम्लात ज़ाहिरी तौर पर हाकिमों और हुक्मरानों से जुड़े हैं, और रूहानी मुआम्लात अल्लाह के नेक औलिया—जैसे ग़ौस और क़ुतब—के ज़रिए मुताअल्लिक़ हैं, और ये सब इलाही निज़ाम-ए-क़ुदरत के मातहत काम करते हैं।

[12] तमाम मामलात का अल्लाह की तरफ़ लौटना

हर मुआम्ला, तद्बीर और इंतज़ाम आख़िरकार अल्लाह ही की तरफ़ लौटेगा, ख़ास तौर पर क़यामत के दिन।
अगरचे उस दिन भी फ़रिश्ते मुख़्तलिफ़ कामों पर मामूर होंगे, लेकिन सब कुछ हुक्म-ए-इलाही के तहत होगा, जो यह साबित करता है कि इख़्तियार-ए-मुतलक़ सिर्फ़ अल्लाह का है।

[13] क़यामत के दिन की मिक़दार

बाज़ काफ़िरों के लिए क़यामत का दिन पचास हज़ार साल का महसूस होगा, और बाज़ों के लिए एक हज़ार साल का।
लेकिन मोमिनीन के लिए यह दिन एक फ़र्ज़ नमाज़ के वक़्त से भी छोटा और हल्का महसूस होगा।

लिहाज़ा क़ुरआनी आयात और अहादीस में कोई तज़ाद नहीं है, क्योंकि वक़्त का यह एहसास ईमान और आमाल के एतबार से मुख़्तलिफ़ होगा।

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