कुरान - 32:11 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
۞قُلۡ يَتَوَفَّىٰكُم مَّلَكُ ٱلۡمَوۡتِ ٱلَّذِي وُكِّلَ بِكُمۡ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمۡ تُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Qul yatawaffaakum malakul mawtil lazee wukkila bikum Thumma ilaa rabbikum turja'oon (section 1))

आप फ़रमा दीजिए, 'मौत का फ़रिश्ता [21] जो तुम पर मुक़र्रर किया गया है [22] तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करेगा, फिर तुम अपने रब ही की तरफ़ पलटाए जाओगे [23]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 11

"आप फ़रमा दीजिए, 'मौत का फ़रिश्ता [21] जो तुम पर मुक़र्रर किया गया है [22] तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करेगा, फिर तुम अपने रब ही की तरफ़ पलटाए जाओगे [23]।"

[21] मलक-उल-मौत (मौत का फ़रिश्ता)

इससे मुराद मलक-उल-मौत (हज़रत इज़्राईल अलैहिस्सलाम) हैं, जिन्हें मौत के वक़्त रूहें क़ब्ज़ करने की ख़ास ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
वे अल्लाह के हुक्म से हर जानदार की जान निकालने का यह फ़रीज़ा अंजाम देते हैं।

[22] इलाही हुक्म से तअय्युन

इस फ़रिश्ते को अल्लाह तआला ने इस काम के लिए ख़ास तौर पर मुक़र्रर फ़रमाया है, जो इलाही तक़दीर में निज़ाम और तर्तीब को दिखाता है।
वे अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि अल्लाह के हुक्म और इरादे से काम करते हैं।

[23] रब की तरफ़ वापसी

मौत के बाद हर रूह अल्लाह ही की तरफ़ लौटाई जाएगी, जहाँ उसे अपने आमाल की जवाबदेही का सामना करना होगा।
यह फ़रमान इंसान के लिए एक याददिहानी और चेतावनी है कि वह मौत की हक़ीक़त और रब के हुज़ूर पेशी पर ग़ौर करे।

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