Transliteration: (Wa law shi'naa la-aatainaa kulla nafsin hudaahaa wa laakin haqqal qawlu minnee la amla'anna jahannama minal jinnati wannaasi ajma'een)
"और अगर हम चाहते तो हर जान को उसकी हिदायत अता फ़रमा देते [27], लेकिन मेरी तरफ़ से यह बात साबित हो चुकी है कि मैं ज़रूर जहन्नुम को जिन्नों और इंसानों सब से भर दूँगा [28]।"
अगर अल्लाह चाहता तो हर जान को ज़बरदस्ती मोमिन बना देता—ऐसी तौफ़ीक़ अता फ़रमाता जिसे वे ख़ुशी से क़बूल करते।
ताहम अल्लाह ने इंसान को इख़्तियार और आज़ादी दी है ताकि वह हिदायत को अपनी मर्ज़ी से चुने, जिससे सवाब और अज़ाब बा-मक़सद बनता है।
लिहाज़ा इस आयत पर कोई शुबहा या एतराज़ नहीं हो सकता।
यह ऐलान उन जिन्नों और इंसानों के लिए है जो अपने इख़्तियार से कुफ़्र और शिर्क को चुनते हैं।
यह साबित करता है कि काफ़िर जिन्नात भी जहन्नुम में डाले जाएंगे।
इसका यह मतलब भी है कि जहन्नुम हमेशा के लिए सिर्फ़ काफ़िरों से भरी जाएगी, गुनहगार मोमिनों से नहीं।
अगर गुनहगार मोमिन अपने गुनाहों की पादाश में कुछ अर्से के लिए जहन्नुम में जाएंगे भी, तो उनका क़ियाम आरज़ी होगा, काफ़िरों के दायमी अज़ाब की तरह नहीं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat