कुरान - 32:19 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
أَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ فَلَهُمۡ جَنَّـٰتُ ٱلۡمَأۡوَىٰ نُزُلَۢا بِمَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Ammal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati falahum jannaatul ma'waa nuzulam bimaa kaanoo ya'maloon)

जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, उनके लिए जन्नत के बाग़ात क़ियामगाह के तौर पर हैं; उनकी मेहमान-नवाज़ी के लिए उन आमाल के बदले जो वे करते थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 19

"जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, उनके लिए जन्नत के बाग़ात क़ियामगाह के तौर पर हैं; उनकी मेहमान-नवाज़ी के लिए उन आमाल के बदले जो वे करते थे।"

यह आयत सालेहीन और सच्चे मोमिनीन के उस अज़ीम इनाम को बयान करती है जो उन्हें उनके नेक आमाल और इख़्लास के बदले जन्नतुल मावा में दिया जाएगा, जहाँ उनकी शाहाना मेहमान-नवाज़ी होगी।

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