कुरान - 32:25 सूरह अस-सज्दा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفۡصِلُ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Inna rabbaka huwa yafsilu bainahum yawmal qiyaamati feemaa kaanoo feehi yakhtalifoon)

बेशक आपका रब ही क़यामत के दिन उनके दरमियान फ़ैसला फ़रमाएगा उस बात में जिसमें वे इख़्तिलाफ़ करते थे [51]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-सज्दा आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-सजदा तफ़सीर - आयत 25

"बेशक आपका रब ही क़यामत के दिन उनके दरमियान फ़ैसला फ़रमाएगा उस बात में जिसमें वे इख़्तिलाफ़ करते थे [51]।"

[51] इख़्तिलाफ़ात का क़तई और आख़िरी फ़ैसला

यह आयत साबित करती है कि अमली फ़ैसला क़यामत के दिन ही होगा, जहाँ:

  • मोमिनीन को जन्नत में दाख़िल किया जाएगा,

  • काफ़िरों को जहन्नुम में झोंक दिया जाएगा।

अगरचे क़ौली फ़ैसला (हक़ और बातिल की तमीज़) दुनिया में वही के ज़रिए हो चुका है, लेकिन अमली जज़ा और सज़ा का ज़हूर आख़िरत ही में मुम्किन है।

इसका यह मफ़हूम भी है कि क़यामत के दिन अल्लाह तआला मोमिनों और काफ़िरों के रास्ते अलग कर देगा—दोनों जमाअतों के लिए अलग-अलग ठिकाने मुक़र्रर फ़रमाकर हमेशा के लिए तमाम झगड़ों का ख़ात्मा फ़रमा देगा।

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