कुरान - 26:208 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

208
وَمَآ أَهۡلَكۡنَا مِن قَرۡيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ

Transliteration: (Wa maaa ahlaknaa min qaryatin illaa lahaa munziroon)

और हमने किसी बस्ती को हलाक नहीं किया मगर इस हाल में कि उसके लिए डराने वाले (पैग़म्बर) मौजूद थे [204]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 208 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 208

"और हमने किसी बस्ती को हलाक नहीं किया मगर इस हाल में कि उसके लिए डराने वाले मौजूद थे [204];"

[204] हुज्जत-ए-तमामी और नबियों की आमद

अल्लाह तआला का यह अद्ल है कि जब तक किसी क़ौम के पास अपना रसूल या डराने वाला नबी भेज कर हुज्जत तमाम न कर दे, तब तक उस पर अज़ाब नाज़िल नहीं फ़रमाता। हर कौम को पहले सीधे रास्ते की दावत दी गई और हलाकत से आगाह किया गया।

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